नकदी से जुड़ी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए म्यूचुअल फंड्स पर कर्ज लेने का चलन बढ़ा है. बैंक भी ग्राहकों को फंड बेचने की बजाए इसके बदले लोन लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
कानपुर
के रहने वाले राधेश्याम
दीक्षित को बेटी के लिए स्कूटी
खरीदनी थी. उन्होंने
सोचा कि म्यूचुअल फंड से पैसा
निकालकर बिटिया को स्कूटी
दिलवा देंगे. जब
उन्होंने यूनिट बेचने के
लिए ऑनलाइन अप्लाई किया,
तो उनके सर्विस
प्रोवाइडर ने उन्हें इसके
बजाए म्यूचुअल फंड के बदले
लोन लेने की सलाह दी. यहां
पर्सनल या ऑटो लाेन के मुकाबले
ब्याज भी बहुत कम था.
वहीं प्रीपेमेंट
पर फीस भी नहीं थी. राधेश्याम
को यह तरीका जच गया.
उन्होंने
लोन के लिए अप्लाई किया.
एक घंटे में
पैसा उनके अकाउंट में और शाम
तक स्कूटी घर के दरवाजे पर
थी. यह
कहानी सिर्फ राधेश्याम और
उनकी बिटिया की नहीं,
बल्कि भारतीय
निवेश और लोन के बाजार में आ
रहे बड़े बदलाव की भी है.
भारत में बीते कुछ साल से ब्याज दरें तेजी से बढ़ी हैं. इसी के साथ ही रिजर्व बैंक ने असुरक्षित कर्ज पर बंदिशें भी काफी बढ़ा दी हैं. नतीजतन न सिर्फ कर्ज लेना महंगा ही नहीं मुश्किल भी हो गया है. सिबिल स्कोर खराब होने के चलते बैंक पर्सनल लोन के आवेदन ठुकरा रहे हैं; वहीं अगर दे भी रहे हैं तो वह भी महंगी ब्याज दर पर. यही कारण है कि लोगों के बीच सोना, शेयर या एफडी गिरवी रखकर लोन लेने का चलन बढ़ा है. इस बीच कर्ज के बाजार में म्यूचुअल फंड के बदले कर्ज तेजी से लोकप्रिय हुआ है.
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के पास म्यूचुअल फंड के बदले लोन की पूछताछ में 50 फीसद का इजाफा हुआ है. ग्राहक फोन कर पूछ रहे हैं कि उनके मौजूदा निवेश के बदले उन्हें कितना लोन मिल सकता है. हालांकि बाजार के जानकार एक रुझान को लेकर आगाह भी कर रहे हैं. जिसमें लोग बाजार में गिरावट के बीच नए निवेश के लिए भी पुराने निवेश पर मिलने वाले इस सस्ते और आसान कर्ज का इस्तेमाल कर रहे हैं.
तेजी
से बढ़ी लोकप्रियता
म्यूचुअल
फंड को गिरवी रखकर कर्ज के
प्रति आकर्षण का एक बड़ा कारण
कम ब्याज दरें हैं. आमतौर
पर बैंक या डिजिटल लोन देने
वाली एनबीएफसी 9.5 से
12% ब्याज
पर म्यूचुअल फंड के बदले लोन
दे रही हैं, जो
झटपट कर्ज के रूप में लोकप्रिय
क्रेडिट कार्ड लोन और पर्सनल
लोन से काफी सस्ता है.
कर्ज लेने वाले
को 6 से
12 महीने
के लिए उसके पास मौजूद म्यूचुअल
फंड स्कीम के बाजार मूल्य का
50% से 60%
तक कर्ज मिल
जाता है. इसके
साथ ही डिजिटलीकरण के चलते
यह कर्ज आसान भी है. गोल्ड
लोन की तरह आपको व्यक्तिगत
रूप से बैंक या गोल्ड लोन कंपनी
के दफ्तर नहीं जाना होता है.
घर बैठे मिनटों
में बिना झंझट कर्ज मिल जाता
है, वह
भी बिना सिबिल स्कोर जांचे.
बाजार
में टिके रहने का फायदा
म्यूचुअल
फंड के बदले कर्ज का एक फायदा
यह है कि आपको बाजार में गिरावट
के दौरान यूनिट बेचकर नुकसान
नहीं उठाना पड़ता. निवेशक
को बाजार में टिका रहता है.
इससे एक ओर
जहां वह अपने पास मौजूद फंड
से छह महीने से एक साल की अवधि
में कर्ज को चुका भी सकता है.
वहीं बाजार
में सुधार होने या ऊपर जाने
पर यूनिट्स बेच सकते हैं.
वहीं बैंक
चूंकि निवेश मूल्य के 50
से 60 फीसदी
पर ही कर्ज देता है, ऐसे
में उसके पास भी बाजार की गिरावट
में गिरवी रखे फंड के डूबने
के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा
होती है.
कंपनियां
दे रही कर्ज पर जोर
भारतीय
शेयर बाजार बीते कुछ महीने
में बड़ी और लंबी गिरावट देख
चुका है. बाजार
गिरा तो इसका असर म्यूचुअल
फंड के निवेश पर भी पड़ा है.
बाजार में
गिरावट से म्यूचुअल फंड
निवेशकों के हाथ भी जले हैं.
ऐसे में कई
निवेशकों ने अपना पुराना निवेश
निकालना शुरू कर दिया है,
वहीं कुछ अपने
मौजूदा निवेश को रोक रहे हैं.
म्यूचुअल फंड
कंपनियों के लिए गिरते बाजार
में यह दोहरा संकट है.
इसे देखते हुए
फंड हाउस और बैंक लोगों को
म्यूचुअल फंड की यूनिट बेचने
की बजाए इसके बदले लोन लेने
को प्रोत्साहित कर रहे हैं.
निवेश में टिके रहने का मौका: आपको अपनी निवेश को बेचे बिना पैसे मिल जाते हैं. भविष्य में बाजार की तेजी का फायदा मिल सकता है.
कम ब्याज दर: म्यूचुअल फंड के बदले लोन की ब्याज दरें आमतौर पर पर्सनल लोन की तुलना में कम होती हैं.
त्वरित लोन: कुछ वित्तीय संस्थान ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन करने की सुविधा प्रदान करते हैं.
म्यूचुअल फंड पर कर्ज के नुकसान:
लोन पर प्रोसेसिंग फीस: आपको लोन पर ब्याज के अलावा प्रोसेसिंग फीस भी देनी होती है.
ऋण सीमा: आप गिरवी रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट के मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत ही ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं.
डिफ़ॉल्ट का जोखिम: यदि आप लोन का भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो बैंक आपकी म्यूचुअल फंड इकाइयों को बेच सकता है.

No comments:
Post a Comment