Saturday, 27 December 2008
मंदी का ढिंढोरा क्यों
पूरी दुनिया मंदी के दौर से गुजर रही हे बात सोलह आने सही हे। शेयर बाजार औंधे मुँह गिर रहा हे उद्योग भी मंदी की मार से अछूते नहीं हे परन्तु भारत के परिद्रश्य में वास्तव में इसे मंदी कहना सही नहीं हे। हम अमेरिका की मंदी को भारत की अर्थ्व्यवाषा में फिट नहीं कर सकते। हलाकि अमेरिकी मंदी निर्यात आयात या शेयर बाज़ार के संस्थागत निवेशको पर तो असर दिखा रही हे लेकिन अभी भी भारत में स्थिति इतनी ख़राब नहीं हे कई उद्योग अभी भी इससे अछूते हे जैसे मीडिया। यद्यपि मीडिया में विज्ञापन इससे अवश्य प्रभावित हुए हे परन्तु कई मीडिया हॉउस इसका ग़लत फायदा उठा कर अपने नए प्रोजेक्ट्स के लिए सेविंग्स में जुट गई हे। इसके लिए वे ओफ्फिसिअल खर्चो में कमी करना, कर्मचारियो की छटनी जेसे हाथकंडे अपना रही हे। और ढिंढोरा मंदी का पीट रही हे। अजी दुनिया की गंदगी साफ़ करने वाले मीडिया पहले अपने मन की गंदगी साफ़ करो। ये मंदी नहीं तुम्हारा मंद दिमाग की परेशानी हे।
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